करुणा

समूची मानवता आज अस्त व्यस्त और त्रस्त ।बुद्ध की करुणा को बनाना होगा अस्त्र शस्त्र ।अंगुलीमाल को भी करुणा करती…

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त्रस्त है

आज जमीं और आस्मां त्रस्त है ।आदमी अपने कर्मों में मदमस्त है ।जल थल नभ सभी करुणाग्रस्त है ।पेड़ पौधा…

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मृत्यु

मृत्यु प्रकृति का अंतिम सत्यफिर भी रहते अनभिज्ञ मदमस्तइस सत्य को मानव करता ध्वस्तकुकर्म करता रहता,नहीं समझता अपनत्वझगड़ा झंझट फसाद…

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रात

रात यूँही चुपचाप ढलती रही
दिल के पल पे यादो की रेल
धीरे धीरे गुजरती रही

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परिप्रेक्ष्य !!

लफ्ज़ो पर ऐतबार करते हो , कभी खामोशियों से गुफ्तगू कर देख लीजिये ..
दिल के टुकड़ों में गिनते हो , पर कभी नज़रो को भी हमारे पढ़ लीजिये ..

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