मैं झरती रही हरश्रृंगार सी रात भर,
तुम बेली की तरह चढ़ते रहे शिखर
शाम
शाम ढलती है बेनूर सी उदासी में,
बारिस के बाद एक अजीब सा सन्नाटा |
मैं झरती रही हरश्रृंगार सी रात भर,
तुम बेली की तरह चढ़ते रहे शिखर
शाम ढलती है बेनूर सी उदासी में,
बारिस के बाद एक अजीब सा सन्नाटा |