मृत्यु

मृत्यु प्रकृति का अंतिम सत्यफिर भी रहते अनभिज्ञ मदमस्तइस सत्य को मानव करता ध्वस्तकुकर्म करता रहता,नहीं समझता अपनत्वझगड़ा झंझट फसाद…

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