समूची मानवता आज अस्त व्यस्त और त्रस्त ।
बुद्ध की करुणा को बनाना होगा अस्त्र शस्त्र ।
अंगुलीमाल को भी करुणा करती निरस्त ।
जैन की करुणा बनाती सबको सशक्त ।
गाँधी की करुणा ने किया शास्त्रो को निशक्त ।
गर जीवन करुणा से हो सिद्धहस्त ।
नहीं हो सकता समाज कहीं से रोगग्रस्त ।
बिन करुणा आदमी होता अस्त वयस्त ।
करुणा विरोधी मानव रहता अभिसप्त ।
करुणा से करुणा उपजे मानवता बने सशक्त ।
असहिष्णुता ,उन्मादिता उच्छृंखलता हो ध्वस्त ।
विश्व युद्ध की चर्चा सदा हो जाये निरस्त।
